जेल में था शिक्षक, विभाग देता रहा वेतन: सरगुजा शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। शासकीय प्राथमिक शाला पेंडरखी के प्रधान पाठक विजय कुमार यादव को हत्या के प्रयास के मामले में अदालत ने पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद, विभाग ने उन्हें नौ महीने तक निलंबित नहीं किया और उन्हें वेतन मिलता रहा। सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी की शिकायत के बाद विभाग हरकत में आया और 22 अक्टूबर 2026 को शिक्षक को निलंबित करने का आदेश जारी किया गया। इस मामले में तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और क्लस्टर संकुल समन्वयक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, और कलेक्टर अजीत वसंत ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।

सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड में शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है, जहां हत्या के प्रयास के एक मामले में दोषी ठहराए गए और जेल भेजे गए एक प्रधान पाठक को नौ महीने तक वेतन मिलता रहा। शासकीय प्राथमिक शाला पेंडरखी में पदस्थ विजय कुमार यादव को अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बावजूद, शिक्षा विभाग ने समय पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

यह मामला वर्ष 2019 का है, जब प्रधान पाठक विजय कुमार यादव के खिलाफ मणिपुर थाने में हत्या के प्रयास का एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। इस गंभीर आरोप के बाद भी, उनकी सेवा जारी रही, जो विभागीय नियमों की अनदेखी को दर्शाता है।

इस मामले में अंबिकापुर के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 3 जनवरी 2026 को सुनवाई पूरी करते हुए विजय कुमार यादव को दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, जिसके बाद उन्हें केंद्रीय जेल अंबिकापुर भेज दिया गया। हालांकि, अक्टूबर 2026 में उन्हें हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई और वे रिहा हो गए।

दोषसिद्धि और जेल में रहने के बावजूद, शिक्षा विभाग इस पूरे घटनाक्रम से अनजान बना रहा या उसने जानबूझकर कार्रवाई नहीं की। यह स्थिति तब और भी चौंकाने वाली हो जाती है जब सरकारी नियमों के तहत 48 घंटे से अधिक जेल में रहने पर किसी भी सरकारी कर्मचारी का स्वतः निलंबन हो जाना चाहिए।

विभाग की इस निष्क्रियता पर सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने संज्ञान लिया और कलेक्टर से शिकायत की। उनकी शिकायत के बाद ही विभाग हरकत में आया। अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के लगभग नौ महीने बाद, 22 अक्टूबर 2026 को, शिक्षक विजय कुमार यादव के निलंबन का आदेश जारी किया गया।

इस नौ महीने की देरी ने विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह सवाल उठ रहा है कि जब सरकारी नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि 48 घंटे से अधिक जेल में रहने पर कर्मचारी का स्वतः निलंबन हो जाता है, तो इस मामले में तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

कलेक्टर तक शिकायत पहुंचने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। प्रशासन ने इस गंभीर लापरवाही के लिए तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और क्लस्टर संकुल समन्वयक (सीएससी) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे समय पर जानकारी न देने और कार्रवाई न करने का जवाब मांगा गया है।

सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “मामला संज्ञान में आने के बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। तत्कालीन बीईओ और सीएससी को नोटिस जारी किया गया है। जांच के बाद आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी। ” वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने कहा, “दोषसिद्धि और जेल में रहने के बावजूद शिक्षा विभाग ने समय पर कार्रवाई नहीं की। विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदेहास्पद है, मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ” कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार लोगों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।