छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार की नियुक्ति से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य शासन के शीर्ष अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। बिलासपुर स्थित मुख्य पीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने आदेश का समय पर पालन न होने पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार अश्वनी गुरडेकर को पद से हटाने और एक नए पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति से जुड़ा है। उच्च न्यायालय ने 3 मार्च 2026 को एक अहम आदेश जारी किया था, जिसमें तत्कालीन रजिस्ट्रार गुरडेकर को उनके पद से हटाने का निर्देश दिया गया था। यह आदेश इसलिए दिया गया था क्योंकि उनके पास रजिस्ट्रार के पद के लिए निर्धारित आवश्यक योग्यताएं नहीं थीं।
इसके बाद, न्यायालय ने 15 मई 2026 को एक और स्पष्ट आदेश जारी किया। इस आदेश में राज्य शासन को यह निर्देश दिया गया था कि वह आठ सप्ताह की निर्धारित समय सीमा के भीतर छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल में एक नए पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति सुनिश्चित करे। यह निर्देश फार्मेसी काउंसिल के सुचारु संचालन और वैधानिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण था।

हालांकि, न्यायालय द्वारा दी गई आठ सप्ताह की निर्धारित समय सीमा समाप्त हो गई, लेकिन फार्मेसी काउंसिल में नए पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी। कोर्ट के स्पष्ट आदेश का समय पर पालन न होने से प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही सामने आई। इस ढिलाई के कारण न्यायालय के आदेश की अवहेलना हुई।
न्यायालय के आदेश का पालन न होने के बाद, डॉ. राकेश गुप्ता ने इस मामले में कानूनी कदम उठाया। उन्होंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में एक अवमानना याचिका दायर की। इस याचिका के माध्यम से उन्होंने संबंधित अधिकारियों की लापरवाही और न्यायालय के आदेश की अनदेखी को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।
उच्च न्यायालय ने 26 अक्टूबर 2026 को इस अवमानना याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान, अदालत ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया और सीधे उन अधिकारियों को नोटिस जारी करने का फैसला किया, जो इस मामले में जिम्मेदार माने गए हैं। यह कदम न्यायालय की ओर से आदेशों के पालन को लेकर उसकी दृढ़ता को दर्शाता है।
जिन अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, स्वास्थ्य संचालक संजीव झा और छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष अरुण मिश्रा शामिल हैं। इन सभी वरिष्ठ अधिकारियों को न्यायालय के आदेश का पालन न होने के संबंध में जवाबदेह ठहराया गया है और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
अदालत ने इन सभी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। उन्हें न्यायालय के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर नए पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई और न्यायालय के आदेश का पालन क्यों नहीं हो सका।
इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। यदि अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जा सकती है। अब सबकी नजरें स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के आने वाले लिखित स्पष्टीकरण पर टिकी हैं और यह देखना होगा कि क्या विभाग जल्द ही नए पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति करेगा। इस मामले का अंतिम फैसला कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर निर्भर करेगा।
