जूनियर वकीलों की आर्थिक सहायता पर हाईकोर्ट का बड़ा कदम, स्टेट बार काउंसिल को मसौदा तैयार करने का निर्देश।

बिलासपुर हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ में नए नामांकित वकीलों को मासिक आर्थिक सहायता प्रदान करने के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल को इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन तैयार करने को कहा है। चीफ जस्टिस केआर महापात्र की डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान, बार काउंसिल ने गाइडलाइन बनाने के लिए एक महीने का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इस मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

छत्तीसगढ़ में नए नामांकित वकीलों को मासिक आर्थिक सहायता प्रदान करने के महत्वपूर्ण मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल को विस्तृत गाइडलाइन तैयार करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश चीफ जस्टिस केआर महापात्र की डिवीजन बेंच द्वारा बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान जारी किया गया। इस पहल का उद्देश्य युवा वकीलों को उनके शुरुआती करियर में वित्तीय स्थिरता प्रदान करना है।

सुनवाई के दौरान, छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल की ओर से अधिवक्ता पलाश तिवारी ने कोर्ट से गाइडलाइन तैयार करने के लिए एक महीने का समय मांगा। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए बार काउंसिल को आवश्यक मसौदा तैयार करने का अवसर दिया। मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 दिसंबर 2026 की तारीख तय की गई है, जिस दिन इस संबंध में आगे की प्रगति पर विचार किया जाएगा।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कोर्ट को सूचित किया कि नए नामांकित वकीलों को वित्तीय सहायता देने के मुद्दे पर 30 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में चर्चा नहीं हो सकी थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस महत्वपूर्ण विषय पर 27 अक्टूबर को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में विचार किए जाने की संभावना जताई गई थी। यह दर्शाता है कि राज्य सरकार भी इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह पाया कि नए वकीलों को आर्थिक सहायता देने के लिए स्टेट बार काउंसिल की ओर से अब तक कोई मसौदा गाइडलाइन तैयार नहीं की गई है। इस पर बार काउंसिल के अधिवक्ता पलाश तिवारी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार से फंड जारी होने की स्थिति में ही वित्तीय सहायता के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइन पेश की जा सकेगी। यह फंड की उपलब्धता को गाइडलाइन के मसौदे से जोड़ता है।

जनहित याचिका दायर करने वाले सिद्धांत दास सुनवाई के दौरान स्वयं उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत से नए वकीलों के हित में जारी होने वाली राशि के उचित उपयोग और उसकी प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए ठोस सुझाव देने का अवसर मांगा। इस उद्देश्य से, सिद्धांत दास ने सुनवाई को स्थगित करने का अनुरोध भी किया, ताकि वे अपने सुझावों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकें।

हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य के विधि एवं विधायी कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से 24 अक्टूबर 2026 को पेश किए गए शपथपत्र को भी रिकॉर्ड पर लिया। यह शपथपत्र मामले से संबंधित कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर प्रकाश डालता है और इसे अदालत की कार्यवाही का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

अब इस मामले में राज्य सरकार द्वारा फंड जारी करने, नए वकीलों को आर्थिक सहायता देने के लिए विस्तृत गाइडलाइन तैयार करने और जारी की गई राशि के उपयोग की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे अहम होंगे। अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को होगी, जिसमें याचिकाकर्ता सिद्धांत दास, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर, छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल की ओर से अधिवक्ता पलाश तिवारी और बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से अधिवक्ता यश त्रिपाठी उपस्थित रहेंगे।