छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने और प्रताड़ित करने के गंभीर मामले में डॉ. संजय प्रकाश को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने 26 अक्टूबर को इस मामले में सजा के बिंदु पर विस्तृत सुनवाई के बाद यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। इस फैसले के तहत, डॉक्टर को अपनी शेष सजा पूरी करने के लिए 10 दिसंबर 2026 तक विचारण न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि डॉ. संजय प्रकाश पहले ही एक साल, दो महीने और 14 दिन की अवधि जेल में बिता चुके हैं। इस अवधि को उनकी कुल तीन साल की सजा में समायोजित किया जाएगा। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा यानी 10 दिसंबर 2026 तक डॉक्टर आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो संबंधित न्यायालय को कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार होगा।
यह पूरा मामला एक महिला की आत्महत्या से जुड़ा है, जिसके लिए डॉ. संजय प्रकाश पर उसे प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि डॉक्टर द्वारा की गई प्रताड़ना के कारण ही महिला ने यह आत्मघाती कदम उठाया था। इस दलील को कोर्ट ने गंभीरता से लिया और अपराध की प्रकृति को देखते हुए सजा का निर्धारण किया।

सुनवाई के दौरान, डॉ. संजय प्रकाश के अधिवक्ता ने न्यायालय से सजा कम करने का अनुरोध किया था। अधिवक्ता ने दलील दी कि डॉक्टर की उम्र लगभग 50 वर्ष है और उनके बच्चे मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, परिवार की पूरी जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। यह भी बताया गया कि डॉक्टर पहले ही एक साल से अधिक का समय जेल में बिता चुके हैं, इसलिए उनकी सजा में नरमी बरती जानी चाहिए।
हालांकि, अपीलकर्ता की ओर से डॉक्टर की सजा कम करने की मांग का कड़ा विरोध किया गया। अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि यह एक गंभीर अपराध है, जिसमें महिला को इस हद तक प्रताड़ित किया गया कि उसने अपनी जान ले ली। ऐसे मामलों में डॉक्टर को अधिकतम सजा मिलनी चाहिए ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए। राज्य शासन ने भी इस पक्ष का समर्थन करते हुए सजा कम न करने की अपील की।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अपराध की गंभीरता और इसी घटना से जुड़े भारतीय दंड संहिता की धारा 498-A (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा महिला के प्रति क्रूरता) के मामले में डॉक्टर की दोषसिद्धि को भी ध्यान में रखा। धारा 498-A के तहत भी डॉ. संजय प्रकाश को तीन साल की सजा सुनाई गई थी। इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद, न्यायालय ने आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध में तीन साल के कठोर कारावास की सजा निर्धारित की।
न्यायालय ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि डॉक्टर को जेल में बिताई गई अवधि का लाभ मिलेगा, लेकिन उन्हें शेष सजा भुगतनी होगी। इसके लिए उन्हें 10 दिसंबर 2026 तक विचारण न्यायालय में आत्मसमर्पण करना अनिवार्य है। यदि वे इस आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें उनकी गिरफ्तारी भी शामिल हो सकती है।
