बस्तर में चक्रवाती तूफान का खतरा: भारी बारिश और बाढ़ की आशंका, रहें सतर्क

उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में संभावित भीषण चक्रवाती तूफान के मद्देनजर बस्तर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। भारी बारिश और बाढ़ की आशंका को देखते हुए कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशन में राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संभावित खतरे वाले गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है और उन्हें नदी-नालों से दूर रहने तथा सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। आपात स्थिति से निपटने के लिए 18 से अधिक राहत शिविर तैयार किए गए हैं और एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सहित बचाव दल पूरी तरह मुस्तैद हैं।

उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में संभावित भीषण चक्रवाती तूफान के खतरे और इसके परिणामस्वरूप बस्तर में भारी बारिश व बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में संभावित आपदा से निपटने के लिए राहत और बचाव की व्यापक तैयारियां युद्धस्तर पर की जा रही हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में जान-माल का कम से कम नुकसान हो और प्रभावितों को तत्काल सहायता मिल सके।

संभावित खतरे की आशंका वाले गांवों में लगातार मुनादी कराई जा रही है, जिसके माध्यम से ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है। लोगों को नदी-नालों से दूर रहने, जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बिना किसी देरी के सुरक्षित स्थानों पर जाने और प्रशासन द्वारा जारी सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की समझाइश दी जा रही है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर ग्रामीण तक संभावित खतरे की जानकारी पहुंचे और वे अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा सकें।

इंद्रावती, मारकंडेय और नारंगी नदियों के तटीय तथा निचले इलाकों में बसे गांवों को विशेष निगरानी में रखा गया है। जगदलपुर, बकावंड, लोहंडीगुड़ा और बस्तर तहसील के संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासनिक अमला सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। मैदानी स्तर पर निगरानी और राहत कार्यों के प्रभावी समन्वय के लिए कुल 13 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति पर पैनी नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति में प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करने के लिए 18 से अधिक स्थानों को राहत शिविर के रूप में तैयार किया गया है। इनमें प्राथमिक शाला भवनों, सामाजिक भवनों, मंगल भवनों और धर्मशालाओं को शामिल किया गया है। इन राहत शिविरों में नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है, जिनकी जिम्मेदारी है कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को भोजन, स्वच्छ पेयजल और आवश्यक चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जा सकें।

जिला कार्यालय की नाजिर शाखा के पास एक 24 घंटे संचालित बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। यह नियंत्रण कक्ष केंद्रीय जल आयोग के साथ निरंतर संपर्क में रहकर इंद्रावती नदी के जलस्तर और क्षेत्र में बारिश की स्थिति पर लगातार नजर रखेगा। नियंत्रण कक्ष में 26 से 31 अक्टूबर तक अधिकारियों और कर्मचारियों की चार पालियों में ड्यूटी लगाई गई है, ताकि किसी भी समय आपातकालीन सूचनाओं का आदान-प्रदान और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

आपात स्थिति में बचाव कार्यों को अंजाम देने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और नगर सेना को पूरी तरह तैयार रखा गया है। इन बचाव दलों को मोटर बोट, लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, अंडरवाटर रेस्क्यू सिस्टम, पोर्टेबल फ्लोटिंग पंप और अन्य सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशासन ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और सूचना मिलते ही बिना किसी देरी के राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

बाढ़, जलभराव या किसी भी आपात स्थिति में नागरिक जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष के नंबर 07782-223122 पर 24 घंटे संपर्क कर सकते हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से विशेष अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें, नदियों और निचले इलाकों में अनावश्यक रूप से जाने से बचें तथा मुनादी के जरिए जारी सभी सुरक्षा निर्देशों का गंभीरता से पालन करें। प्रशासन का मुख्य जोर इस बात पर है कि संभावित खतरे की स्थिति में ग्रामीणों को समय रहते सतर्क कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके, जिससे किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके।