सरकार को छात्रावास अधीक्षकों का अल्टीमेटम: 12 नवंबर को प्रदेशव्यापी हड़ताल, नहीं मानी मांगें तो बड़ा आंदोलन

छत्तीसगढ़ के छात्रावास अधीक्षकों ने 24 घंटे की ड्यूटी, पदोन्नति में अड़चन और मेस बजट में कटौती सहित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। जशपुर में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर संघ ने 12 नवंबर 2026 को प्रदेशव्यापी एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की घोषणा की है, चेतावनी दी है कि मांगें न मानी गईं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन होगा।

जशपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के छात्रावास अधीक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 24 घंटे की ड्यूटी, पदोन्नति के सीमित अवसर, मेस बजट में कटौती और ऑनलाइन व्यवस्था की तकनीकी परेशानियों से नाराज अधीक्षकों ने 12 नवंबर 2026 को प्रदेशव्यापी एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल का ऐलान किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी पांच सूत्रीय मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया जाएगा।

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छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ ने अपनी मांगों को लेकर आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव के नाम जशपुर जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से संघ ने अपनी प्रमुख समस्याओं को उजागर किया है और सरकार से उन पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि 12 नवंबर 2026 की हड़ताल के बाद भी यदि ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

अधीक्षकों का सबसे बड़ा विरोध 24 घंटे छात्रावास में सशरीर मौजूद रहने की अव्यावहारिक व्यवस्था को लेकर है। संघ का कहना है कि इससे उन्हें न तो साप्ताहिक अवकाश मिल पाता है और न ही सार्वजनिक छुट्टियों का लाभ। उन्होंने निश्चित कार्य घंटे निर्धारित करने और आवश्यकता पड़ने पर ऑन-कॉल व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, महिला अधीक्षकों के पुरुष परिजनों के छात्रावास परिसर में रहने संबंधी नियमों को स्पष्ट करने और छात्रावास परिसर में उपलब्ध शासकीय आवास के लिए HRA (मकान किराया भत्ता) देने की भी मांग की गई है।

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पदोन्नति के सीमित अवसर भी अधीक्षकों की नाराजगी का एक बड़ा कारण है। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि कई कर्मचारी वर्षों तक एक ही पद पर काम करते रहते हैं और उसी पद से सेवानिवृत्त हो जाते हैं, जिस पर उनकी नियुक्ति हुई थी। संघ ने कैडर पुनर्गठन के साथ मंडल संयोजक, क्षेत्र संयोजक और सहायक सांख्यिकी अधिकारी जैसे पदों पर पदोन्नति के अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, शिक्षक संवर्ग से प्रभारी अधीक्षक बनाए गए कर्मचारियों को दोहरी जिम्मेदारी से राहत देने की भी मांग की गई है। उन्हें स्कूल में पढ़ाने के साथ-साथ छात्रावास का संचालन, विद्यार्थियों के रिकॉर्ड का संधारण और बीमार बच्चों की देखभाल भी करनी पड़ती है। संघ ने ऐसे प्रभारी अधीक्षकों को VSK ऐप के जरिए स्कूल में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की अनिवार्यता से छूट देने की मांग की है।

मेस बजट में कटौती को लेकर भी अधीक्षकों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ का तर्क है कि छात्रावासों में आमतौर पर 50 से 100 विद्यार्थियों के लिए सामूहिक रूप से भोजन तैयार होता है। ऐसे में दो-तीन विद्यार्थियों के अनुपस्थित रहने से भोजन और राशन की वास्तविक लागत में कोई बड़ी कमी नहीं आती, फिर भी विद्यार्थियों की अनुपस्थिति के आधार पर मेस राशि में कटौती की जाती है। संघ ने मांग की है कि कम से कम 24 दिनों की उपस्थिति होने पर पूरे महीने का मेस बजट स्वीकृत किया जाए। इसके साथ ही, HMS पोर्टल में 30 दिनों के मेडिकल अवकाश का प्रावधान लागू करने की मांग की गई है, ताकि बीमारी के कारण अनुपस्थित विद्यार्थियों के नाम पर मेस राशि में अनावश्यक कटौती न हो।

ऑनलाइन सिस्टम की खामियां भी अधीक्षकों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। संघ ने छात्रावासों में कंप्यूटर, इंटरनेट और ऑपरेटर जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। अधीक्षकों का कहना है कि कई बार सर्वर, इंटरनेट या पोर्टल की तकनीकी समस्या के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। संघ ने स्पष्ट किया है कि सर्वर या तकनीकी खराबी के लिए अधीक्षकों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए और तकनीकी व्यवस्था दुरुस्त होने तक ऑनलाइन उपस्थिति की अनिवार्यता में छूट दी जानी चाहिए।