छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी अपने पहले दो दिवसीय दौरे के बाद 26 अक्टूबर की देर शाम दिल्ली के लिए रवाना हो गईं। प्रदेश प्रभारी नियुक्त होने के 32 दिन बाद हुए इस दौरे में उन्होंने छत्तीसगढ़ के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की ‘कुंडली’ यानी उनके कामकाज और सक्रियता का विस्तृत फीडबैक लिया। इस दौरान उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया।

25 और 26 अक्टूबर को राजधानी रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित इन बैठकों का उद्देश्य महज औपचारिक मुलाकातें नहीं था, बल्कि संगठन की वर्तमान स्थिति, सरकार के कामकाज की समीक्षा, मंत्रियों की सक्रियता और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा करना था। इन बैठकों को 2028 के आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अपने दौरे के पहले दिन, 25 अक्टूबर को, स्मृति ईरानी ने प्रदेश सह-प्रभारी सिद्धार्थ शम्भू के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसके उपरांत उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री, प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग और जिला प्रभारियों, जिलाध्यक्षों तथा पूर्व सांसदों-विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। दिन के अंतिम चरण में भाजपा कोर ग्रुप के सदस्यों के साथ भी विस्तृत चर्चा की गई।

इन बैठकों में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, पुराने और अनुभवी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने तथा सरकार की जनहितैषी योजनाओं को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों का नियमित दौरा करने, कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार, विधायकों को भी अपने क्षेत्रों में जनता के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने की सलाह दी गई।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैठकों के दौरान कुछ मंत्रियों के कामकाज को लेकर शिकायतें मिलने की जानकारी भी सामने आई। दूसरे दिन, 26 अक्टूबर को, विधायकों और सांसदों के साथ बैठकों के बाद राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों से भी वन-टू-वन चर्चा हुई। मीडिया रिपोर्टों में यह भी प्रकाशित हुआ कि कुछ जनप्रतिनिधियों ने अपनी सिफारिशों पर कार्रवाई नहीं होने और मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर असंतोष व्यक्त किया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मंत्री दयालदास बघेल, टंकराम वर्मा, श्याम बिहारी जायसवाल और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के विभागों से जुड़े मुद्दों पर विशेष रूप से चर्चा हुई। दयालदास बघेल से विभागीय सक्रियता बढ़ाने पर जोर देने को कहा गया, जबकि गजेंद्र यादव से तबादलों में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल किए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का विस्तृत जवाब अभी अलग से सामने आना बाकी है।
स्मृति ईरानी के इस दो दिवसीय दौरे का व्यापक संदेश स्पष्ट है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना तथा जनता के बीच सक्रियता बढ़ाना भाजपा की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पार्टी का लक्ष्य है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की जाए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन बैठकों में उठी शिकायतों और दिए गए निर्देशों पर कितना अमल होता है और इसका असर जमीनी स्तर पर दिखाई देता है या नहीं। पार्टी के लिए यही सबसे बड़ी कसौटी होगी कि वह आंतरिक चुनौतियों का समाधान कर जनता का विश्वास कैसे जीत पाती है।
