बस्तर जिले में किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। सितंबर में आई भीषण बाढ़ से हुई तबाही से किसान अभी उबर भी नहीं पाए थे कि अब चक्रवाती तूफान अर्नब और इंद्रावती नदी का बढ़ता जलस्तर उनके लिए नई मुसीबत लेकर आया है। इस दोहरी मार के कारण जिले में पककर तैयार खड़ी लगभग 15 करोड़ रुपये की धान की फसल पर बर्बादी का गंभीर संकट मंडरा रहा है।

मौसम विभाग ने चक्रवाती तूफान अर्नब के कारण बस्तर में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। आगामी 28 और 29 अक्टूबर को क्षेत्र में 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने की आशंका है। ऐसे समय में जब धान की फसल पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है और खेतों में मध्यम एवं पछेती धान लहलहा रही है, तेज हवाएं और बारिश किसानों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकती हैं।
तेज हवाओं और भारी बारिश से खेतों में खड़ी धान की फसल गिर सकती है, जिससे उसकी गुणवत्ता और पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, कटाई के बाद खलिहान में रखी फसल भीग सकती है। लगातार नमी बने रहने से धान में सड़न पैदा होने और समय से पहले अंकुरण होने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति होगी। जिले में अनुमानित 15 करोड़ रुपये की धान की फसल इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने की आशंका है।

आसमान से बरसने वाले पानी के साथ-साथ नदियों का बढ़ता जलस्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है। ओडिशा के खातीगुड़ा बांध से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। बांध से प्रति सेकंड 130 क्यूमेक पानी निकलने के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी के जलस्तर में हर घंटे 2 से 3 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे तटीय इलाकों में जलभराव और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।
किसानों को अभी भी सितंबर महीने में आई बाढ़ के नुकसान से राहत नहीं मिली है। उस दौरान इंद्रावती और नारंगी नदी में आई भीषण बाढ़ ने बस्तर, बकावंड, लोहंडीगुड़ा और जगदलपुर के 43 गांवों को अपनी चपेट में ले लिया था। खेतों में चार से छह फीट तक पानी भर गया था, जिससे हजारों क्विंटल धान की फसल पानी में डूबकर खराब हो गई थी।
सितंबर की बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसान लंबे समय से राहत राशि का इंतजार कर रहे हैं। मुआवजे की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने जगदलपुर में एक बड़ा प्रदर्शन किया था, जिसमें 500 ट्रैक्टरों के साथ रैली निकाली गई थी। किसानों ने सरकार से प्रति एकड़ 65 हजार रुपये के मुआवजे की मांग की थी, लेकिन अब तक उनके खातों में एक रुपया भी नहीं आया है।
संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है और तैयारियों में जुट गया है। राज्य के 46 प्रमुख जलाशयों से पानी निकाला जा रहा है, जिसमें अब तक 22 से 23 प्रतिशत पानी खाली किया जा चुका है। राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) को तैनात किया गया है और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टुकड़ियां भी बुलाई गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
सुकमा, बस्तर, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में कुल 18 राहत शिविर तैयार किए गए हैं। जरूरत पड़ने पर तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को इन सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष नीलू बघेल ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “बस्तर का अन्नदाता पूरी तरह बेबस हो चुका है। सितंबर की बाढ़ में फसल डूब गई थी, लेकिन खातों में एक रुपया भी नहीं आया। अब चक्रवात और बांध के पानी से 15 करोड़ से अधिक की फसल बर्बादी के कगार पर है। “
