बस्तर की धरती से लौह अयस्क का व्यापक स्तर पर खनन कर देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) से अब स्थानीय विकास और रोजगार के संबंध में जवाबदेही मांगी जा रही है। बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश उपाध्यक्ष नवनीत चांद ने एनएमडीसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब खनिज संपदा बस्तर की है और परियोजनाएं भी बस्तर में ही संचालित हो रही हैं, तो स्थानीय युवाओं को कितना रोजगार मिला है और खनन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों को वास्तविक रूप से कितना लाभ पहुंचा है।

नवनीत चांद ने इस संदर्भ में कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद पिछले 26 वर्षों में बस्तर क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, इस औद्योगिक विकास का वास्तविक और अपेक्षित लाभ स्थानीय जनता तक किस हद तक पहुंचा है, इसका एक स्पष्ट और तथ्यात्मक हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने एनएमडीसी से विशेष रूप से स्थानीय युवाओं की भर्ती प्रक्रिया, उन्हें दिए गए नियमित रोजगार के अवसर, ठेका श्रमिकों की वर्तमान स्थिति और स्थानीय कारोबारियों को इन परियोजनाओं से मिले व्यावसायिक अवसरों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
एनएमडीसी की विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े रोजगार और स्थानीय भागीदारी के दावों पर सवाल उठाते हुए नवनीत चांद ने पूछा कि स्थानीय युवाओं को कितनी नियमित नौकरियां प्रदान की गई हैं, विभिन्न पदों पर कितने पद रिक्त हैं, और ठेका श्रमिकों की कार्यदशा तथा उनके अधिकारों की स्थिति क्या है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय लोगों को रोजगार और व्यवसाय में प्राथमिकता देने के एनएमडीसी के दावों पर पारदर्शी और विश्वसनीय जानकारी सामने आनी चाहिए। चांद ने स्पष्ट किया कि औद्योगिक विकास को केवल उत्पादन और निवेश के आंकड़ों के आधार पर मापा नहीं जा सकता।

नवनीत चांद ने आगे कहा कि औद्योगिक विकास की असली कसौटी यह है कि स्थानीय युवाओं को कितने रोजगार के अवसर मिले हैं, प्रभावित परिवारों को कितनी आर्थिक सुरक्षा प्रदान की गई है, और संबंधित क्षेत्र को शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बेहतर बुनियादी सुविधाएं किस स्तर तक उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने एनएमडीसी से इन सभी महत्वपूर्ण सवालों का तथ्यात्मक और संतोषजनक जवाब सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करने की अपेक्षा की है, ताकि स्थानीय जनता को उनकी भागीदारी और लाभ के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सके।
खनन परियोजनाओं से प्रभावित होने वाले परिवारों के पुनर्वास, उन्हें दिए गए मुआवजे, उनकी आजीविका के साधनों और इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी एनएमडीसी से जवाबदेही तय करने की मांग उठाई गई है। नवनीत चांद ने कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया, पेड़ों की कटाई, पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया और ग्रामसभा की वैधानिक भूमिका से जुड़े सभी प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि प्रभावित परिवारों को अब तक मिले लाभों और लंबित पड़े मामलों का विस्तृत विवरण भी सार्वजनिक किया जाए।
चांद ने एनएमडीसी और नगरनार स्टील प्लांट सहित बस्तर क्षेत्र में संचालित अन्य औद्योगिक परियोजनाओं में स्थानीय रोजगार के अवसरों, ठेका व्यवस्था के तहत श्रमिकों की स्थिति और स्थानीय कारोबारियों की भागीदारी का एक तुलनात्मक ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जनजातीय कल्याण योजनाओं के लिए आवंटित बजट और उनके जमीनी परिणामों की गहन समीक्षा करने के साथ-साथ पेसा (Panchayats Extension to Scheduled Areas) और वन अधिकार कानून के प्रावधानों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।
नवनीत चांद ने बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, बिजली आपूर्ति और सिंचाई जैसी आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की वर्तमान स्थिति का भी व्यापक आकलन करने को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं के विकास और स्थानीय जनता तक उनकी पहुंच का मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि औद्योगिक विकास का लाभ केवल उद्योगों तक ही सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समुदाय के जीवन स्तर में भी सुधार लाए।
अंत में, नवनीत चांद ने स्पष्ट किया कि यदि बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों से उद्योगों को भारी मुनाफा हो रहा है, तो स्थानीय जनता को इन संसाधनों के दोहन से मिले लाभ का भी स्पष्ट और पारदर्शी हिसाब सामने आना चाहिए। उन्होंने एनएमडीसी से स्थानीय भर्ती के आंकड़े, ठेका श्रमिकों की संख्या, पुनर्वास कार्यक्रमों की प्रगति और प्रभावित क्षेत्रों में किए गए विकास कार्यों के विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक करने का आग्रह किया। यह जानकारी स्पष्ट करेगी कि बस्तर के विकास में एनएमडीसी की भूमिका का वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों तक किस हद तक पहुंचा है और उनकी जीवनशैली पर इसका क्या सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
