छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ससुर की हत्या के मामले में बहू और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के ग्राम खड़ेनाडीह में बहू गीता निर्मलकर (30) और उसके प्रेमी लेखराम निषाद (25) ने मिलकर गीता के ससुर मनोहर निर्मलकर (63) को करंट लगाकर मौत के घाट उतार दिया था। इस जघन्य अपराध को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने इसे एक सामान्य हादसा दिखाने की कोशिश की थी। हत्या के लगभग 15 महीने बाद, न्यायालय ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जिससे इस मामले का पटाक्षेप हुआ।

दरअसल, गीता निर्मलकर गांव की सेवा मंडली में भजन गाने जाती थी, जहां उसकी मुलाकात पड़ोसी गांव के संगीतकार लेखराम निषाद से हुई। लेखराम उसे हारमोनियम सिखाता था और इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं। लेखराम का गीता के घर हारमोनियम सिखाने के बहाने अक्सर रात में आना-जाना लगा रहता था। गीता के ससुर मनोहर निर्मलकर को यह दोस्ती और लेखराम का इस तरह घर आना बिल्कुल पसंद नहीं था। वह इसका कड़ा विरोध करते थे और लेखराम के आने पर गाली-गलौज पर उतर आते थे, जिससे गीता और लेखराम दोनों परेशान थे।
ससुर के लगातार विरोध और आपत्ति से तंग आकर गीता और लेखराम ने मनोहर निर्मलकर की हत्या की साजिश रची। यह साजिश 29 जून 2025, रविवार को तैयार की गई थी। अपनी योजना को अंजाम देते हुए, 16 जुलाई, बुधवार की रात लगभग 12 बजे, जब मनोहर निर्मलकर सो रहे थे, तब गीता और लेखराम ने उन्हें बिजली का करंट लगाकर मार डाला। इस प्रकार, उन्होंने अपने रास्ते से मनोहर को हटाने का क्रूर तरीका अपनाया।

हत्या को अंजाम देने के बाद, आरोपियों ने इसे एक सामान्य घटना दिखाने की भरसक कोशिश की। 17 जुलाई, गुरुवार की सुबह करीब 6 बजे, बहू गीता ने ग्रामीणों को बताया कि ससुर रात में शराब पीकर साइकिल से गिर गए थे और सुबह उनकी मौत हो गई। जब मोहल्ले की महिलाएं कफन लेकर घर पहुंचीं और उन्होंने मनोहर के शरीर पर हल्दी लगे निशान देखे, तो गीता ने जवाब दिया कि गिरने से चोटें आई थीं, इसलिए हल्दी लगाई गई है। यह सब हत्या को छिपाने की एक सोची-समझी चाल थी।
हालांकि, यह चाल ज्यादा देर तक नहीं चल पाई। जब शव को श्मशान घाट ले जाया गया और चिता पर लिटाने से पहले कपड़ा हटाया गया, तो ग्रामीणों ने मनोहर के शरीर पर गहरे घाव और जलने के निशान देखे। इन गंभीर चोटों को देखकर ग्रामीणों को संदेह हुआ कि यह सामान्य मौत नहीं है, बल्कि हत्या का मामला हो सकता है। उनकी आशंका गहराने लगी और उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना देने का फैसला किया।
पुलिस के अनुसार, हत्या को अंजाम देने के बाद प्रेमी लेखराम निषाद चाहता था कि मनोहर निर्मलकर का अंतिम संस्कार जल्द से जल्द कर दिया जाए, ताकि मामला दब जाए और किसी को शक न हो। इसी जल्दबाजी में उसने गांव में मौत की खबर फैलने से पहले ही श्मशान में लकड़ी भिजवा दी थी। सुबह होते ही वह पहुंचा और अर्थी की तैयारी में जुट गया। उसने घरवालों और पड़ोसियों से कहा कि शव रात का है, इसलिए देरी नहीं होनी चाहिए और तुरंत अंतिम संस्कार कर देना चाहिए। इधर, गांव में अभी शव यात्रा की मुनादी की तैयारी चल रही थी और मृतक का पूरा परिवार भी नहीं पहुंच पाया था। लेकिन लेखराम ने खुद ही शव को कंधा दिलवाकर मुक्तिधाम पहुंचा दिया। जब यह जानकारी गांव के कुछ प्रमुख लोगों को लगी तो उन्होंने श्मशान पहुंचकर लेखराम से सवाल-जवाब शुरू कर दिए। ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए कहा कि, “न तुम मृतक के बेटे हो, न रिश्तेदार, फिर इतनी जल्दी क्यों? इतनी बेचैनी किस बात की है?” ग्रामीणों की बात सुनकर लेखराम घबरा गया, जिससे उनका संदेह और पुख्ता हो गया।
ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पोस्टमॉर्टम की शॉर्ट रिपोर्ट में मौत का कारण बिजली का करंट लगना सामने आया, जिससे हत्या की आशंका की पुष्टि हो गई। इसके बाद पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया और परिवार के सदस्यों की गतिविधियों, उनके संपर्कों और घटना से जुड़े दूसरे पहलुओं की गहराई से पड़ताल की।
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी सबूत भी जुटाए गए, जिनसे आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किए गए बिजली के तार, रबर के दस्ताने, खून लगा गमछा और आरोपियों के मोबाइल फोन जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए। इन सभी जांचों, तकनीकी जानकारियों और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों गीता निर्मलकर और लेखराम निषाद तक पहुंची और उन्हें गिरफ्तार किया।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे न्यायालय) में हुई। न्यायालय ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद ग्राम खड़ेनाडीह की गीताबाई निर्मलकर (30) और उसके प्रेमी लेखराम निषाद (25) को मनोहर निर्मलकर की हत्या का दोषी ठहराया। न्यायालय ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस पूरे मामले की जांच तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक मुकेश सिंह ने की थी, जबकि राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक घनश्याम सिंह साहू ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की।
