मंत्रियों के प्रदर्शन पर उठे गंभीर सवाल, कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने टिप्पणी करने से किया परहेज

छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘नो कमेंट्स’ का जवाब एक बार फिर सुर्खियों में है। भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के दो दिवसीय दौरे के दौरान पार्टी की बैठकों में कुछ मंत्रियों के कामकाज को लेकर शिकायतें सामने आईं। इन शिकायतों के बारे में पूछे जाने पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने ‘नो कमेंट्स’ कहकर जवाब देने से परहेज किया। नेताम के इस जवाब ने कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन मंत्री कवासी लखमा के ‘ना कमेंस’ वाले उस वायरल वाकये की याद दिला दी, जिस पर सोशल मीडिया पर खूब मीम बने थे। स्मृति ईरानी ने अपने दौरे में संगठन और सरकार के कामकाज की समीक्षा की, साथ ही 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी चर्चा की।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘नो कमेंट्स’ का जवाब एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के हालिया दौरे के दौरान पार्टी की बैठकों में कुछ मंत्रियों के कामकाज को लेकर शिकायतें सामने आने की खबरें रहीं। दौरे के दूसरे दिन सोमवार को जब कृषि मंत्री रामविचार नेताम से इन शिकायतों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने ‘नो कमेंट्स’ कहकर टिप्पणी करने से परहेज किया। उनके इस जवाब ने तत्काल ही कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन मंत्री कवासी लखमा के ‘ना कमेंस’ वाले उस वायरल वाकये की याद दिला दी, जिस पर सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से मीम बनाए गए थे।

स्मृति ईरानी 25 और 26 अक्टूबर को प्रदेश प्रभारी बनने के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ पहुंची थीं। अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में पार्टी के पदाधिकारियों, पूर्व सांसदों-विधायकों, वर्तमान जनप्रतिनिधियों और निगम-मंडल के अध्यक्षों के साथ कई बैठकें कीं। इन बैठकों में संगठन की वर्तमान स्थिति और सरकार के कामकाज की गहन समीक्षा की गई। इसके साथ ही, वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।

जानकारी के अनुसार, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों और निगम-मंडल के अध्यक्षों के साथ हुई बैठकों में कुछ मंत्रियों के कामकाज को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आईं। इन शिकायतों में विभागीय सक्रियता और जनहित के कार्यों में अपेक्षित गति की कमी जैसे मुद्दे शामिल थे। बताया गया कि स्मृति ईरानी ने पूर्व जनप्रतिनिधियों से यह भी पूछा कि 2028 में प्रदेश में भाजपा की सरकार दोबारा बनाने के लिए क्या प्रभावी रणनीति अपनाई जानी चाहिए, ताकि पार्टी अपनी स्थिति मजबूत कर सके।

सोमवार को बैठकों के समापन के बाद जब कृषि मंत्री रामविचार नेताम बाहर निकले, तो मीडियाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और बैठक के संबंध में सवाल पूछने लगे। नेताम शुरुआत में बैठक को लेकर कुछ भी कहने से बचते रहे। उन्होंने कहा कि यह बैठक संगठन की थी और इसे लेकर वे कोई चर्चा नहीं करेंगे। हालांकि, जब उनसे मंत्रियों को लेकर आई शिकायतों के बारे में सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने संक्षिप्त रूप से ‘नो कमेंट्स’ कहकर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिससे यह मामला और गरमा गया।

रामविचार नेताम के इस ‘नो कमेंट्स’ वाले जवाब ने जुलाई 2021 के उस घटनाक्रम की याद ताजा कर दी, जब कांग्रेस सरकार में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और विधायक बृहस्पति सिंह के बीच विवाद बढ़ गया था। बृहस्पति सिंह ने उस समय आरोप लगाया था कि अंबिकापुर जाते समय उनके काफिले पर हमला हुआ और इसके पीछे सिंहदेव का हाथ था। विधानसभा में इस मामले पर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का बयान आने के बाद सिंहदेव ने सरकार से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी। उन्होंने सदन में कहा था कि जब तक सरकार उनके बारे में स्पष्ट जवाब नहीं देती, वे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे। इसके बाद वे सदन छोड़कर चले गए थे, जिससे विपक्ष ने हंगामा किया और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी।

बाद में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, सिंहदेव और वरिष्ठ नेताओं के बीच एक बैठक भी हुई थी, लेकिन बैठक के बाद सिंहदेव ने कहा था कि वे अपनी बात पर कायम हैं। इस पूरे घटनाक्रम की उस समय प्रदेश की राजनीति में खूब चर्चा हुई थी। सिंहदेव के विधानसभा छोड़ने के अगले दिन एक समाचार चैनल की लाइव कवरेज के दौरान रिपोर्टर ने तत्कालीन मंत्री कवासी लखमा से इस राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर सवाल पूछा था। जवाब में लखमा ने अंग्रेजी के ‘नो कमेंट्स’ को अपने विशिष्ट अंदाज में ‘ना कमेंस’ कहा था। उनका यह जवाब कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद उनके बोलने के अंदाज को लेकर खूब मीम बने थे।

स्मृति ईरानी के दौरे के दूसरे दिन की बैठकों में मंत्रियों के विभागों से जुड़ी जानकारी और शिकायतों का ब्योरा लेकर पहुंची थीं। सोमवार को हुई बैठक में उन्होंने मंत्रियों से उनके विभागीय कामकाज की विस्तृत जानकारी ली। जिन विभागों को लेकर शिकायतें सामने आई थीं, उनसे जुड़े मंत्रियों से जवाब भी मांगे गए। बैठक में दयालदास बघेल, टंकराम वर्मा, श्याम बिहारी जायसवाल और गजेंद्र यादव समेत अन्य मंत्रियों के कामकाज पर विशेष रूप से चर्चा हुई। मंत्री दयालदास बघेल से उनके विभाग में सक्रियता बढ़ाने और उनकी मौजूदगी व कामकाज दिखाई देने के निर्देश दिए गए। टंकराम वर्मा और श्याम बिहारी जायसवाल को भी विभागीय कामकाज में सुधार लाने के निर्देश दिए गए।

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से विभाग में ट्रांसफर से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामलों पर सीधे सवाल किए गए। उनसे पूछा गया कि ऐसे मामले सामने कैसे आ रहे हैं और इस तरह की घटनाओं को रोकने तथा विभागीय व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए गए। अन्य मंत्रियों से भी विभागीय बजट का समय पर उपयोग करने और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने को कहा गया, ताकि जनता को उनका लाभ समय पर मिल सके।

बैठक में मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में उनके दौरों की जानकारी भी प्रस्तुत की गई। स्मृति ईरानी ने मंत्रियों से पूछा कि वे अपने प्रभार वाले जिलों में कितनी बार जा रहे हैं और वहां कार्यकर्ताओं के साथ कितना संवाद कर रहे हैं। मंत्रियों को नियमित रूप से जिलों का दौरा करने और स्थानीय स्तर पर संगठन की समस्याओं को सुनने के निर्देश दिए गए। उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन समेत प्रभार वाले जिलों की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्रियों को अपने दौरे बढ़ाने के लिए कहा गया। स्मृति ईरानी ने जोर देकर कहा कि प्रभारी मंत्री की भूमिका केवल प्रशासनिक बैठकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें कार्यकर्ताओं से मिलकर उनकी समस्याओं को समझना चाहिए और फिर अधिकारियों के साथ बैठक कर उनका समाधान कराना चाहिए। त्योहारों के दौरान भी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और मेल-मिलाप बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

मंत्रियों के कामकाज को लेकर शिकायतें केवल पूर्व जनप्रतिनिधियों की बैठकों तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि वर्तमान सांसदों के साथ हुई बैठक में भी कुछ सांसदों ने अपनी सिफारिशों पर काम नहीं होने की बात उठाई। उन्होंने कहा कि उनके कहने पर काम नहीं होते और इससे कार्यकर्ताओं के बीच उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठते हैं। कुछ सांसदों ने अधिकारियों के रवैये पर भी नाराजगी जताई। शिकायतें सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा को भी बैठक में बुलाया गया। इसके बाद सांसदों ने उनके सामने भी अपनी समस्याएं रखीं। स्मृति ईरानी ने सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बढ़ाने और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत बताई। बैठकों में कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने, उनकी नाराजगी दूर करने और जनता के बीच सक्रिय रहने पर भी जोर दिया गया। पार्टी के सामने 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी का लक्ष्य रखते हुए संगठन और सरकार के कामकाज में बेहतर तालमेल बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।